दंगल या शतरंज :: म्हारी छोरिया छोरों से कम हैं के !
26/12/2016 -दंगल मतलब अपने कौशल का सही समय में प्रदर्शन ,आसान शब्दो में कहे तो खुद की ही तय की गयी सीमाओं से बाहर आने का पूरी ताकत से किया गया प्रयास , कुछ ऐसा ही संदेश देती है आमिर खान की खेल पृस्ठभूमि पर आधारित फिल्म "दंगल " भारत के लिए कुश्ती में पहला स्वर्ण पदक जीतने वाली गीता फोगाट के साथ एक खेल के प्रति जुनूनी पिता महावीर सिंह फ़ोगाट की असल जिंदगी की कहानी पर बनी यह फिल्म ना सिर्फ खेल में देश की स्थिति से हमें अवगत कराती है बल्कि सामाजिक ताने बाने और रूढ़ियों ,अंधविश्वास के बीच अपनी बेटियों के लिए खुद के साथ जमाने से लड़ते पर आगे बढ़ते देशभक्त की कहानी है मैंने भी सोचा क्यूँ ना इस फिल्म के माध्यम से बच्चो को देश के लिए मेडल लाना क्या होता है ये दिखाया जाए तो फिर क्या था हम पहुँच गए अपने शतरंज खिलाड़ी बच्चो के साथ दंगल देखने और आप से यही कहेंगे अपनी बच्चो के साथ खासतौर पर बेटियों के साथ यह फिल्म देखने जरूर जाए