चैसबेस और हिन्दी का सफर -2
27/11/2016 -2013 की विश्व चैंपियनशिप के बाद चैसबेस और हिन्दी के लेख अब कभी कभार इसकी अंतर्राष्ट्रीय वैबसाइट पर आने लगे थे इस दौरान विश्व शतरंज ओलम्पियाड में भारत नें कांस्य पदक जीतकर इतिहास बनाया तो इतिहास में हिन्दी और शतरंज के संबंध दर्शाता मेरा एक लेख प्रकाशित हुआ । फिर एक बार पुनः मौका मिला जब सोच्चि रूस में पुनः विश्व शतरंज चैंपियनशिप आनंद और कार्लसन के मध्य आरंभ हुआ लोग वही थे बस किरदार बदल गए थे । कार्लसन जहां विश्व विजेता थे तो आनंद कैंडिडैट जीतकर अबकी बार चैलेंजर की भूमिका में थे । आनंद भले ही इस बार फिर नहीं जीत पाये थे पर आनंद नें अपने जुझारूपन से दुनिया के हर शतरंज प्रेमी का मन जीत लिया था और सबको ये संदेश दे दिया था चाहे जो हो हमे प्रयास करना नहीं छोड़ना चाहिए !